किसी ने सच ही कहा है कि अगर आप किसी चीज़ को करने की ठान लेते हैं तो परिस्तिथिया आपके अनुकूल बनती जाती हैं. इसी बात को ध्यान में रखकर मैं एक पब्लिक सर्विस एड(psa) बनाने में जुट गयी...मालूम हो की हमारे कॉलेज के syllabus के अनुसार हमें एक मिनट का एक psa बनाना था और हमें इसके लिए मार्क्स भी मिलने थे. पहला काम था psa के लिए एक "अच्छा विषय" तलाश करना. "अच्छा विषय" क्योंकि हमारे टीचर को कोई चीज़ अगर पसंद नहीं आती तो वो हम स्टुडेंट्स की बैंड बजाने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे...लेकिन उनसे बचने का कोई रास्ता भी नहीं था. खैर, सबने डरते-डरते अपने-अपने टॉपिक्स बताए. किसी ने घरेलु हिंसा, कन्या भ्रूणहत्या जैसे विषयों को चुना तो किसी ने बाल मजदूरी और बाल विवाह जैसे विषयों को, लेकिन सर ने सबको बहुत डांट लगाई. उनकी शिकायत थी कि स्टुडेंट्स स्क्रिप्ट पर मेहनत नहीं करते और उम्मीद करते हैं कि उनकी स्क्रिप्ट को बेस्ट कहा जाये..फिर मेरी बारी आई अपना विषय बताने की..मैंने डरते-डरते उनके चैम्बर में कदम रखा..सर उस समय किसी को फ़ोन पर किसी बात के लिए बधाइयाँ दे रहे थे, इसलिए मुझे उम्मीद थी की उनका मूड अब अच्छा होगा..फिर उन्होंने फ़ोन रखा और मेरा टोपिक माँगा...
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